Friday, July 6, 2007

अपना-अपना चेहरा

अपना-अपना चेहरा

उसके बारे में चारों ओर यह कहा जाने लगा था कि सुबह उठते ही यदि कोई व्यक्ति उसका चेहरा देख लेता है तो उसे खाना नहीं मिलता, सारे दिन भूखा रहना पड़ता है। इसलिए लोग अब उससे बचने लगे थे, उसे दुत्कारने लगे थे और यदि दिन में भी वह नजर आ जाता तो उसे गालियां देने लगते, फिर ईश्वर से प्रार्थना करते- ''हे ईश्वर कुछ भी अशुभ घटित होने से बचाना, संकट से हमारी रक्षा करना।'' यह बात फैलते-फैलते वहां के राजा के कानों में पहुंची। राजा को विश्वास नहीं हुआ मगर सभी मंत्रियों के कहने से उसने आजमाना जरूर चाहा।
एक दिन शाम को उसे महल में बुलाया गया। उसे खूब अच्छे-अच्छे पकवान वगैरह खिलाए गए और फिर रात भर महल में ही रखा गया। सुबह राजा के उठते ही उसे राजा के समक्ष पेश किया गया। राजा ने एक नजर उसे देखा फिर शिकार खेलने निकल पड़ा। संयोग से दिन भर राजा को कोई शिकार नहीं मिला, अपने सैनिकों से भी वह बिछुड़ गया और दिन भर राजा को भूखा ही रहना पड़ा। शाम को किसी तरह राजा अपने महल में पहुंचा और अपने सभासदों की एक विशेष सभा बुलवाई और उसको फांसी का आदेश जारी कर दिया। फांसी के समय उससे उसकी अंतिम इच्छा पूछी गई। उसने राजा से मिलना चाहा। राजा वहां आया। वह राजा से बोला- ''हुजूर, मेरा चेहरा देखने मात्र से आपको कल दिन भर भूखा रहना पड़ा, मगर कल सुबह मैंने आपका चेहरा देखा तो आज मुझे फासी लग रही है।'' राजा के पास इसका कोई उत्तर नहीं था।